मन की बात


जल रक्षक हो कर्म हमारे

» घर के भीतर कमरे में- रेडियो,टी.व्. समाचार पत्र में खबरे जलाभिषेक अभियान प्रारभ पानी बचाओ आन्दोलन शुरुवात, कुओं का मंत्रो से शुधीकरण आज पानी सुरक्षित तो कल हमारा सुरक्षित जलसंवर्धन के प्रयोग इन सबके साथ बड़ी बड़ी तस्वीर, बड़े-बड़े बयान, फिल्मे ————- |
और कुछ समय बाद जैसे ही कदम घर के बहार निकालते है सड़क पर बिना टोंटी के नल बह रहे है पाईप लाइन में चीड है कही आपस में लोक लाद रहे है -| तालाब, कुँआ बाबलियाँ सूख गई है लम्बी-लम्बी कतरे है पानी के लिए कितना अंतर है घर-बाहर में
आज ये पानी के झगडे गली गली हो रहे है कल शहर और फिर प्रदेश के बीच और आने वाले कल में देशो के बीच होंगे-| (प्रदेश देश के जल विवाद चल रहे ) बहुत बड़ी बात न करते है हुए- में इस चोटें शहर की बात करता हूँ यहाँ रानी दुर्गावती के काल की बावन ताल तालियाँ हुआ करती थी अनेक बबलियाँ हुआ करती थी कितन अच्छा था उस समय का जल प्रभंधन वर्ष भर पानी भरा रहता था |
» एक बात ठीक है तब और अबकी जनसंख्याँ में परिवर्तन आय है आज पानी का उपयोग बाधा है रानी दुगावती के समय के आनेक तालाब तालियाँ बावाधीया सूख गई इन पर मकान के निर्माण हो गए कुछ खेल के मैदान हो गए फिट भी जो शेष रह गए है उन्हें बचने का प्रयास करना होगा प्रश्न ये की सरकारी विभाग केबल गर्मी के मौसम में जन प्रभंधन को लेकर चिंतित होता है ? जबकि पौरे वर्ष भर ये जल प्रभंधन का कार्य होना चाहिये |
» अपने शहर गाँव के जल प्रभंधन के लिए आम आदमी को आगे आना होगा सिर्फ प्रशाशन के भरोसे कुछ नहीं होगा एक-एक व्यक्ति को जागना होगा सिर्फ पानी बचाने के संकल्प लेने से कुछ नहीं होगा-उस दिशा में प्रयास भी करना होगा |
नहीं तो आने वाले पीयाँ प्रश्न करेगी – हमारे हिस्से के पानी का क्या हुआ ? या सिर्फ रहेगी पानी की कहानी ?
» आईये सोचने में समय व्यर्थ न गवाए एक कदम आप बढाये पानी बचाने एक कदम सरकार बढाए इसके साथ ही में सोचता हूँ जब जल जमीन जंगल हवा सभी कुछ उस परम सत्ता की है तो आपस झगडा क्योँ ? समाये आ गया है हम विशाल ह्रदये के हो जाए और सुने कल – कल बहते झरने की आवाज़ पास से बहती नदी के गीत, पनघट से आते मीठे स्वर (जोकी अब लगभग समाप्त है ) बबलियों के साफ़ पानी में दिखती अपनी तस्वीर और समेटे और सहजे वर्षा जल याद रखे हमारा यह सरीर पञ्च तत्वों से बना है उसमे प्रमुख जन ” चितिजल पावक गगन समीर ”
» मेरा विशवास है इससे पढ़कर आप निकल पड़ेंगे जल क्रांति के लिए स्वयं को एकता के सूत्र पिरोने=अंत में एक बात करना कहता हूँ कवी डॉ. नरेश पांडे शब्दों में ….
चाहे जो धर्म हमारे
जल रक्षक हो कर्म हमारे
हर्ष कुमार तिवारी
११२, सराफा वार्ड जबलपुर